सीखने की प्रक्रिया व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैंः नौटियाल
देहरादून। यूपीईएस ने समावेशी शिक्षा और सामुदायिक सशक्तिकरण की दिशा में एक और पहल करते हुए प्रोजेक्ट ग्रो 2.0 का सफलतापूर्वक समापन किया। सात सप्ताह तक चले इस कार्यक्रम के माध्यम से विश्वविद्यालय के महिला हाउसकीपिंग स्टाफ को अंग्रेजी भाषा एवं संचार कौशल का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम का संचालन स्कूल फॉर लाइफ (एसएफएल), एसएफएल एम्बेसडर्स और मानव संसाधन (एचआर) विभाग के संयुक्त सहयोग से किया गया।
प्रोजेक्ट ग्रो 1.0 की सफलता के बाद शुरू किए गए दूसरे चरण में कंडोली परिसर की महिला हाउसकीपिंग कर्मियों को दैनिक कार्यों में उपयोगी अंग्रेजी भाषा का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व एसएफएल एम्बेसडर्स अलैना वारिस और काशवी केडिया ने किया। उनके साथ कोमलप्रीत कौर, रिया कोटनाला, प्रांजल सैनी, भाव्या जीलुगु, माही मित्तल, ग्रेसी मल्होत्रा, प्रिथा अग्रवाल और अक्षत राज ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह पहल प्रो. विपिन चौहान के मार्गदर्शन में संचालित हुई, जबकि प्रो. राशिका गोकुला और प्रो. सूर्या सिंह ने भी सहयोग दिया।
समापन समारोह में प्रतिभागियों एवं छात्र प्रशिक्षकों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर डॉ. अत्रि नौटियाल ने कहा कि साझा सीखने की प्रक्रिया और निरंतर प्रयास व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों और छात्र एम्बेसडर्स की प्रतिबद्धता की सराहना की। यूपीईएस के कुलपति डॉ. सुनील राय ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों तक शिक्षा सीमित रखना नहीं, बल्कि परिसर से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को सीखने और आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना है।










































