डिग्री देने वालों संस्थान व मकतब पर कोई रोक नहीं

There is no ban on maktabs

काशीपुर। उत्तराखंड में प्राधिकरण से बिना मान्यता प्राप्त चल रहे मदसों सहित अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को तालाबन्दी करने व संचालकों पर पांच लाख रूपये तक जुर्माने लगाने तथा रिसीवर नियुक्त करने का अधिकार भी 30 जून 2026 से प्राधिकरण को मिल गया है। मकतब तथा इन्टर/बारहवीं से उच्च शिक्षा/डिग्री शिक्षा देने वाले अल्पसंख्यक संस्थान अधिनियम परिधि से बाहर हैं व उन्हें चलाने पर कोई रोक नहीं हैं।

सरकार द्वारा गठित उत्तराखंड मदरसा बोर्ड 13 वर्षों तक 5-5 परीक्षायें कराता रहा यद्यपि उसमें परीक्षार्थियों की संख्या कम ही रही हैं। काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन एडवोकेट ने उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद से उसके द्वारा ली गयी परीक्षाओं व परीक्षाओं सहित विभिन्न बिन्दुओं पर सूचनायें चाही थी।  इसके उत्तर में उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद, देहरादून के लोक सूचना अधिकारी/रजिस्ट्रार रामसिंह ने अपने पत्रांक 102, 23 जून 2026 से सूचनायें उपलब्ध करायी है।

इसके अतिरिक्त उत्तराखंड शासन की बेवसाइट पर उपलब्ध उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम 2025 का असाधारण गजट 8 अक्टूबर 2025 तथा उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम (संशोधन) अध्यादेश 2026 का असाधारण गजट 30 जून 2026 भी उपलब्ध है। नदीम को उपलब्ध 30 जून 2026 के असाधारण गजट में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम (संशोधन) अध्यादेश 2026 प्रकाशित हुआ हैं। इससे अधिनियम की धारा 2, 3, 4, 11, 12, 14, व 18 में संशोधन किया गया हैं। धारा 2(क) शैक्षणिक संस्थान की परिभाषा को बदला गया हैं।

अब इसमें कक्षा 8 तक की शिक्षा प्रदान करने वाले ऐसे संस्थान जो सक्षम प्राधिकारी तथा कक्षा 9 से 12 तक की शिक्षा प्रदान करने वाले उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद (उत्तरराखंड बोर्ड) से मान्यता प्राप्त संस्थान है। 45 कानूनी पुस्तकों के लेखक व कानून के जानकार नदीम उद्दीन एडवोकेट के अनुसार कक्षाओें की शिक्षा न देने वाले मकतब तथा कक्षा 1 से 12 तक की शिक्षा देने वाले संस्थानों के अतिरिक्त डिग्री शिक्षा देने वाले संस्थानों सहित सभी शिक्षण संस्थान उनकी परिधि के बाहर हैं।

माननीय उच्च न्यायालय ने भी रिट पिटीशन सं0 835 सन 2025 के साथ अन्य रिटों के निर्णय 26-08-2025 से मकतब को मदरसा से अलग मानते हुये उसे बिना रजिस्ट्रेशन चलने योग्य माना है। कुरान पढ़ना ग्रामर तथा परम्परायें सिखाने वाले संस्थान को मकतब कहा गया हैं जिसमें बच्चे कुरान पढ़ना सीखते हैं। इसे चलाने का अधिकार संविधान संरक्षित अधिकार है।

मदरसा बोर्ड द्वारा नदीम को उपलब्ध सूचना के अनुसार वर्ष 2013 से 2025 तक 5 परीक्षायें मुंशी (हाईस्कूल) मौलवी (हाईस्कूल) आलिम अरबी फारसी (इन्टर मीडियट) आयोजित की है जबकि  2013 से 2024 तक उक्त परीक्षाओं के अतिरिक्त कमिल तथा फाजिल परीक्षायें भी आयोजित की है। इन परीक्षाओं में 2013 में कुल 1605 परीक्षार्थी बैठे जिसमें 506 मुंशी, 564 मौलवी, 278 आलिम अरबी फारसी, 193 कामिल तथा 64 फाजिल के शामिल है।

वर्ष 2014 में कुल 2546 परीक्षार्थी बैठे जिसमें 721 मुंशी, 983 मौलवी, 461 आलिम अरबी फारसी, 348 कामिल तथा 33 फाजिल शामिल है, वर्ष 2015 में कुल 3251 परीक्षार्थी बैठे जिसमें 847 मुंशी, 1356 मौलवी, 446 आलिम अरबी फारसी, 564 कामिल तथा 38 फाजिल शामिल है, वर्ष 2016 में कुल 3892 परीक्षार्थी बैठे जिसमें 1028 मुंशी, 1308 मौलवी, 724 आलिम अरबी फारसी, 719 कामिल तथा 113 फाजिल शामिल है, वर्ष 2017 में कुल 5764 परीक्षार्थी बैठे जिसमें 1355 मुंशी, 1985 मौलवी, 1187 आलिम अरबी फारसी, 1011 कामिल तथा 302 फाजिल शामिल है।

वर्ष 2018 में कुल 5518 परीक्षार्थी बैठे जिसमें 993 मुंशी, 1,955 मौलवी, 988 आलिम अरबी फारसी, 1280 कामिल तथा 302 फाजिल शामिल है, वर्ष 2019 में कुल 5746 परीक्षार्थी बैठे जिसमें 815 मुंशी, 1935 मौलवी, 1145 आलिम अरबी फारसी, 1481 कामिल तथा 370 फाजिल शामिल है, वर्ष 2020 में कुल 5172 परीक्षार्थी बैठे जिसमें 735 मुंशी, 1487 मौलवी, 1015 आलिम अरबी फारसी, 1521 कामिल तथा 414 फाजिल शामिल है, वर्ष 2021 में कुल 4188 परीक्षार्थी बैठे जिसमें 614 मुंशी, 1177 मौलवी, 767 आलिम अरबी फारसी, 1203 कामिल तथा 427 फाजिल शामिल है।

वर्ष 2022 में कुल 3141 परीक्षार्थी बैठे जिसमें 486 मुंशी, 832 मौलवी, 661 आलिम अरबी फारसी, 836 कामिल तथा 326 फाजिल शामिल है,  वर्ष 2023 में कुल 2368 परीक्षार्थी बैठे जिसमें 372 मुंशी, 674 मौलवी, 428 आलिम अरबी फारसी, 675 कामिल तथा 219 फाजिल शामिल है, वर्ष 2024 में कुल 1849 परीक्षार्थी बैठे जिसमें 249 मुंशी, 511 मौलवी, 336 आलिम अरबी फारसी, 558 कामिल तथा 195 फाजिल शामिल है तथा वर्ष 2025 में कुल 738 परीक्षार्थी बैठे जिसमें 163 मुंशी, 333 मौलवी तथा 242 आलिम अरबी फारसी शामिल है।  

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