गोदियाल से डीबेट करने नही पहुंचे बीकेटीसी अध्यक्ष

BKTC Chairman did not show up for debate with Godiyal

देहरादून। बद्रीनाथ धाम मंदिर के चंदा चोरी मामले को लेकर देहरादून प्रेस क्लब में आयोजित ओपन डिबेट में उस समय दिलचस्प स्थिति बन गई, जब बहस के लिए आमंत्रित बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। कार्यक्रम स्थल पर उनके और पूर्व मंदिर समिति अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नाम से अलग-अलग कुर्सियां आरक्षित की गई थीं, लेकिन निर्धारित समय तक हेमंत द्विवेदी की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही।

गोदियाल ने चंदा चोरी प्रकरण को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास उनके खिलाफ कोई ठोस प्रमाण हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए। गोदियाल ने कहा कि लोकतंत्र में केवल आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है। यदि किसी पर भ्रष्टाचार या अनियमितता के आरोप लगाए जाते हैं, तो उन्हें तथ्यों और साक्ष्यों के साथ साबित भी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह हर तरह की जांच के लिए तैयार हैं। हालांकि, बीकेटीसी अध्यक्ष की गैरमौजूदगी के कारण दोनों पक्षों के बीच सीधी बहस नहीं हो सकी।

गणेश गोदियाल ने कहा कि जो व्यक्ति सार्वजनिक रूप से बहस की चुनौती देता है और फिर निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं होता, वह स्वयं अपनी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा देता है। इससे यही संदेश जाता है कि सच्चाई का सामना करने का साहस उनके पास नहीं है।

गोदियाल नेे कहा कि प्रमोद नौटियाल वर्ष 2003 में बीकेटीसी में नियुक्त हुआ था। वर्ष 2010 में भाजपा सरकार में उसके नियमितीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया और वर्ष 2014 में शासन की और से उसकी स्वीकृति दी गई। गोदियाल ने कहा कि वास्तविक प्रश्न यह नहीं है कि प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति कब हुई या उसका नियमितीकरण कब हुआ।

असली सवाल यह है कि बदरीनाथ धाम में दानराशि की कथित चोरी आखिर किसके कार्यकाल में हुई? यदि आज मंदिर की दानराशि की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं, सीसीटीवी फुटेज में नोटों की गड्डियों के गायब होने की बातें सामने आ रही हैं और मंदिर समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं, तो इसकी जवाबदेही वर्तमान प्रबंधन और वर्तमान सरकार की बनती है।

गणेश गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस न तो किसी तथ्य से भागती है और न ही किसी बहस से। गोदियाल ने कहा कि 9 वर्ष से भाजपा की सरकार है यदि उनके (गोदियाल के) कार्यकाल में कुछ गलत हुआ तो आज तक एक्शन क्यों नहीं लिया गया? उन्होंने दोहराया कि देवभूमि की आस्था सर्वाेपरि है। मंदिरों की दानराशि, व्यवस्था और श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा करना सरकार और मंदिर समिति की सर्वाेच्च जिम्मेदारी है।

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