- झंडा मौहल्ला में बंद दुकानें खोलने की मंजूरी
- पुलिस व प्रशासन याचिकाकर्ता को पर्याप्त संरक्षण प्रदान करे
देहरादून। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने झंडा मौहल्ला कोतवाली क्षेत्र में पिछले एक माह से बंद पड़ी अल्पसंख्यक समुदाय की दुकानों को फिर से खोलने का महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि दुकानें खोलने पर यदि कोई अवांक्षित तत्व रुकावट या अप्रिय घटना उत्पन्न करता है, तो पुलिस और प्रशासन याचिकाकर्ता को पर्याप्त संरक्षण प्रदान करेंगे।
न्यायाधीश आलोक महरा की पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा, यदि याचिकाकर्ता दुकान फिर से खोलते हैं और कोई अप्रिय घटना या कानून के खिलाफ खतरा उत्पन्न होता है, तो संबंधित अधिकारी उन्हें कानून के अनुसार पर्याप्त पुलिस सुरक्षा देंगे। न्यायालय ने यह भी कहा कि दुकान बंद होने से जांच एजेंसी साक्ष्य एकत्र करने में असमर्थ है, अतः दुकान खोलना जांच की दृष्टि से भी आवश्यक है। इस आदेश के साथ ही न्यायालय ने रिट याचिका का औपचारिक निपटारा कर दिया।
दरअसल, 18 जून 2026 को झंडा मौहल्ला में कुछ पूर्व-चिन्हित तत्वों ने अल्पसंख्यक समुदाय के दुकानदारों पर हमला किया, तोड़फोड़ की और दुकानें खाली करने की धमकियाँ दीं। इसके बाद से क्षेत्र की कई दुकानें बंद पड़ी हैं, जिससे व्यापारियों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
विभिन्न संगठनों ने उठाई थी मांग
देहरादून। गौरतलब है कि इस मामले को लेकर पिछले कई दिनों से विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक एवं सांगठनिक समूह सक्रिय थे। इन संगठनों ने झंडा मौहल्ला में बंद पड़ी अल्पसंख्यक समुदाय की दुकानें खोलने और सांप्रदायिक तत्वों पर अंकुश लगाने की मांग की थी।
संगठन व दल में सीपीएम से अनन्त आकाश, यूकेडी से लताफत हुसैन, प्रमिला रावत, आईयूपी के केन्द्रीय महामंत्री बालेश बवानिया, उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष सुरेश कुमार, चिन्तन सकलानी, सीटू जिलामहामंत्री लेखराज, उपाध्यक्ष भगवन्त पयाल, एसएफआई के अध्यक्ष नितिन मलेठा, कांग्रेस से अल्ताफ अहमद, नेताजी संघर्ष समिति अध्यक्ष प्रभात डण्डरियाल, बसपा से दिग्विजय, आप से दीप्ति, एआईएलयू से अनुराधा, तंजीमें हिन्द, पीपुल्स फोरम से जयकृत कण्डवाल, भीम आर्मी के आजम खान व डीवाईएफआई के अभिषेक भण्डारी ने साम्प्रदायिक तत्वों का जमकर विरोध किया और प्रशासन से मांग की कि झंडा मौहल्ला में अल्पसंख्यक व्यापारियों की दुकानें खोली जाएँ तथा उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए।
प्रशासन को कई दिये गये कई ज्ञापन
संगठनों ने इस मामले को गंभीरता से उठाते हुए कई अवसरों पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपे,
मुख्य सचिव उत्तराखंड को ज्ञापन दिया गया, जिलाधिकारी देहरादून से मुलाकात की गई,
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन दिया गया, पुलिस अधीक्षक (नगर) से कई बार वार्ता की गई।
मुख्य घटनाएँ
18 जून 2026 को अद्नान सिद्दीकी की दुकान पर हमला, मारपीट और तोड़फोड़ की गई। 7 जुलाई 2026 एसपी नगर ने प्रतिनिधिमंडल को दुकान खोलने का आश्वासन दिया। 9 जुलाई 2026 दुकान खोलने पर फिर धमकी मिली। मौहल्ले में मुसलमानों की दुकान नहीं चलने देंगे। 23 जुलाई 2026 हाईकोर्ट ने दुकान खोलने और पुलिस सुरक्षा का आदेश दिया।
सीपीएम के सचिव अनन्त आकाश ने कहा, हाईकोर्ट के इस आदेश से झंडा मौहल्ला के व्यापारियों को राहत मिली है। अब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह इस आदेश का पालन कराते हुए अल्पसंख्यक व्यापारियों को सुरक्षा प्रदान करे। अन्य संगठनों ने भी हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत किया और प्रशासन से पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की।
प्रशासन पर आई बड़ी जिम्मेदारी
अब प्रशासन पर यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है कि दुकानदार बिना किसी भय के अपनी दुकानें खोल सकें। आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो। पीड़ितों को पर्याप्त पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि दुकानें खोलने में कोई बाधा नहीं है और अवांक्षित तत्वों द्वारा रुकावट डालने पर पुलिस सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस आदेश का कितनी गंभीरता से पालन कराता है और क्या झंडा मौहल्ला में सामान्य व्यावसायिक गतिविधियाँ बहाल हो पाती हैं।










































