फुल स्कॉलरशिप से मिलेगी वंचित छात्रों को नई पहचान
देहरादून। यूपीईएस ने वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए शुरू किए गए ‘प्रोजेक्ट प्रोत्साहन’ के जरिए समावेशी शिक्षा को नया आयाम दिया है। इस पहल के तहत प्रथम पीढ़ी के मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, टेक्नोलॉजी और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
देहरादून स्थित यूपीईएस ने पुरकल यूथ डेवलपमेंट सोसाइटी (पीवाईडीएस) के साथ मिलकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को 100 प्रतिशत स्कॉलरशिप देने की पहल शुरू की है। इसका उद्देश्य उन युवाओं को आगे बढ़ाना है, जो अपने परिवार में पहली बार उच्च शिक्षा तक पहुंच बना रहे हैं।
24 छात्रों को मिल चुका है लाभ
वर्ष 2018-19 में शुरू हुई इस पहल के तहत अब तक वंचित समुदायों के 24 छात्रों को यूपीईएस के विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जा चुका है। इनमें इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, मैनेजमेंट, कॉमर्स, लॉ, डिजाइन, जर्नलिज्म और मीडिया स्टडीज जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन छात्रों को इन्फोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, मारुति सुजुकी, इंडिगो एयरलाइंस, सिलिकॉन लैब्स और कोलंबिया शिपिंग मैनेजमेंट जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में अवसर भी मिले हैं।
दो नए छात्रों को मिली 100 प्रतिशत स्कॉलरशिप
शैक्षणिक सत्र 2025-26 में पीवाईडीएस से जुड़े दो नए छात्रों को यूपीईएस में पूर्ण छात्रवृत्ति पर प्रवेश दिया गया है। इनमें हरिद्वार के पठरी गांव के रहने वाले लकी सिंह और गलजवाड़ी के अंशित ममगाईं शामिल हैं। लकी सिंह बीटेक कंप्यूटर साइंस के छात्र हैं। सीमित संसाधनों वाले परिवार से आने वाले लकी ने 12वीं में 89 प्रतिशत अंक हासिल किए और हाल ही में उनका चयन इन्फोसिस में हुआ है। उनके पिता खेती और राशन की दुकान संभालते हैं, जबकि मां सिलाई का काम करती हैं। वहीं अंशित ममगाईं ने 12वीं में 80.66 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। उनके पिता स्थानीय स्कूल में साइंस लैब असिस्टेंट हैं। अंशित का चयन एचसीएल टेक्नोलॉजीज में ट्रेनी इंजीनियर के रूप में हुआ है।
शिक्षा बदल सकती है पूरा समाजः डॉ. सुनील राय
यूपीईएस के वाइस चांसलर डॉ. सुनील राय ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज का भविष्य बदल सकती है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट प्रोत्साहन के जरिए विश्वविद्यालय यह सुनिश्चित कर रहा है कि प्रतिभाशाली छात्रों को उनकी आर्थिक स्थिति के कारण अवसरों से वंचित न होना पड़े।










































