बढ़ते सांप्रदायिक तनाव पर नागरिक संगठनों ने जताई चिंता

Expressed concern over rising communal tension

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बढ़ती सांप्रदायिक तनाव की घटनाओं को लेकर नागरिकों व सामाजिक संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है। विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्य सचिव को संयुक्त ज्ञापन देकर तत्काल हस्तक्षेप करने और कानून का राज स्थापित करने की मांग की है।

ज्ञापन में कहा गया है कि विगत कुछ समय से देहरादून में सांप्रदायिक उन्माद में खतरनाक वृद्धि हुई है। कुछ असामाजिक तत्वों की और से अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्तियों पर शारीरिक हमले किए जा रहे हैं व उनकी दुकानों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर बंद कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। हाल के दिनों में सामने आई कई घटनाएं इस बढ़ते तनाव की पुष्टि करती हैं।

ज्ञापन में कहा गया है कि अल्पसंख्यक समुदाय की दुकानों को खोलने से रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे उनका आर्थिक जीवन अस्त-व्यस्त हो रहा है और वे आतंकित हैं। ये कृत्य भारतीय संविधान की और से प्रदत्त समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14-18) व स्वतंत्रता के अधिकार (अनुच्छेद 19-22) का उल्लंघन हैं।

मुख्य सचिव से मांग की गई है कि तत्काल हमलावरों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई हो, पीड़ितों को सुरक्षा-राहत, प्रभावित परिवारों व व्यवसायियों को पूर्ण सुरक्षा और नुकसान की भरपाई के उचित कदम उठाए जाएं। कानून का राज स्थापित करते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाए तथा सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों पर कड़ी निगरानी रखी जाए।

सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देना व सभी समुदायों के बीच भाईचारा एवं आपसी विश्वास बढ़ाने के ठोस प्रयास किए जाएं। राजनैतिक दलों एवं सामाजिक संगठनों ने भी राज्य में बढ़ती सांप्रदायिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने हस्तक्षेप की मांग की है।

ज्ञापन में हस्ताक्षर करने वालों सीपीएम राज्य सचिव राजेंद्र पुरोहित, सीपीआई के पूर्व केन्द्रीय कमेटी सदस्य समर भण्डारी, माले के राज्यसचिव इन्देश मैखुरी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिवप्रसाद देवली, सीपीएम देहरादून सचिव अनन्त आकाश, यूकेडी नेता लताफत हुसैन, प्रमिला रावत, किसान सभा के अध्यक्ष दलजीत सिंह, महामंत्री पुरूषोत्तम बडोनी, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष लेखराज, एआईएलयू के महामंत्री एडवोकेट शम्भूप्रसाद मंमगाई, डाक्टर करतार सिंह, आयूपी के केन्द्रीय महामंत्री बालेश बबानिया, सीआईटीयू जिलाउपाध्यक्ष भगवन्त पयाल, जनसंवाद के अध्यक्ष सतीश धौलाखण्डी, एटक के एस एस रजवार, उत्तराखंड पीपुल्स फोरम के अध्यक्ष जयकृत कण्डवाल, बसपा के महामंत्री सतेंद्र चौपडा, आप के कमल राना, भीम आर्मी के आजम खान, अभिषेक भण्डारी डीवाईएफआई, एसएफआई के पूर्व महामंत्री हिमांशु चौहान, उत्तराखंड आन्दोलनकारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष सुरेश कुमार, एडवोकेट दुर्गाध्यानी, अनुराधा, किसान नेता सुधा देवली, याकूब अली, प्रदीप कुमार, अमर बहादुर शाही व रविंद्र नौडियाल आदि के हस्ताक्षर हैं।

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