कांग्रेस ने भूमि घोटालों पर खोला मोर्चा, किया सचिवालय कूच

Congress opens a front against land scams

देहरादून। उत्तराखंड में कथित भूमि घोटालों, सरकारी जमीनों के संदिग्ध हस्तांतरण, भू-माफियाओं के बढ़ते प्रभाव और सरकार की नीतियों के खिलाफ सोमवार को कांग्रेस सड़कों पर उतर आई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में सचिवालय कूच कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने सुभाष रोड पर बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।

इस दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी धक्का-मुक्की हुई, कई कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बाद में पुलिस ने गणेश गोदियाल समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने राज्य में पिछले दस वर्षों के दौरान हुए भूमि आवंटनों, सरकारी जमीनों के हस्तांतरण, भूमि उपयोग परिवर्तन और कथित भूमि घोटालों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग को प्रमुखता से उठाया।

गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि प्रदेश में भू-माफियाओं का नेटवर्क लगातार मजबूत हो रहा है और सरकार प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण देने का काम कर रही है।उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे सीमित भौगोलिक संसाधनों वाले पर्वतीय राज्य में जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सामने आए भूमि संबंधी मामलों ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गोदियाल ने कहा कि वर्ष 2025 में हरिद्वार नगर निगम की भूमि खरीद प्रकरण में जांच के दौरान अनियमितताओं की पुष्टि हुई और कई अधिकारियों पर कार्रवाई भी हुई। इससे स्पष्ट हो गया कि भूमि संबंधी मामलों में व्यापक पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न जनपदों में निजी व्यक्तियों और सरकारी विभागों की बहुमूल्य भूमि को नियमों के विपरीत हस्तांतरित करने तथा निजी हितों के लिए उपयोग करने के कई मामले सामने आए हैं। मसूरी के जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्र की भूमि, डाकपत्थर में जल विद्युत निगम की लगभग 180 एकड़ भूमि तथा नैनीताल के रामगढ़ क्षेत्र में सरकारी भूमि से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने इन सभी प्रकरणों की निष्पक्ष जांच की मांग की।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) के माध्यम से विकसित किए जा रहे लैंड बैंक पर भी सवाल उठाए। गोदियाल ने कहा कि प्रतापनगर समेत टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग, नैनीताल और अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रामीण समुदाय अपनी पारंपरिक, पंचायती और चरागाह भूमि को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

कांग्रेस ने मांग की कि पिछले दस वर्षों में हुए सभी प्रमुख भूमि आवंटनों, खरीद-फरोख्त, भूमि हस्तांतरणों और भूमि उपयोग परिवर्तनों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही विभिन्न विभागों की भूमि के हस्तांतरण और निजी संस्थाओं को किए गए आवंटनों की समीक्षा के लिए स्वतंत्र जांच आयोग गठित किया जाए। पार्टी ने सरकारी भूमि पर हुए कथित अवैध कब्जों और संदिग्ध हस्तांतरणों की पहचान कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की भी मांग की।

कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि भू-माफियाओं से भूमि मुक्त नहीं कराई गई और जमीन से जुड़े मामलों में सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान महंगाई, बेरोजगारी और भूमि विवादों को लेकर भी सरकार को घेरा गया। गोदियाल ने कहा कि उत्तराखंड की जल, जंगल और जमीन किसी भी कीमत पर निजी हितों की भेंट नहीं चढ़ने दी जाएगी। कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिलकर पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग करेगा।

प्रदर्शन में मुख्य रूप से राष्ट्रीय सचिव व विधायक काजी निजामुउद्दीन, फुरकान अहमद, लखपत बुटोला, बिरेन्द्र जाति, महामंत्री राजेन्द्र भण्डारी, उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, राजेन्द्र शाह, पूर्व विधायक राजकुमार, गरिमा महरा दसौनी, राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा, महिला प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला, अल्पसंखयक विभाग अध्यक्ष सुलेमान अंसारी, एनएसयूआई अध्यक्ष विकास नेगी, आमेन्द्र सिंह बिष्ट, मोहित उनियाल, लालचन्द शर्मा, गौरव कुमार गिनी, अभिनव थापर, राकेश नेगी, संजय किशोर, वीरेंद्र पोखरियाल, मदनलाल, सेवादल अध्यक्ष हेमा पुरोहित, महेंद्र नेगी गुरुजी, दिनेश कौशल, पूरन रावत, प्रतिमा सिंह, सुरेंद्र रांगड़, दीप बोरा, एतात् खान, अर्जुन सोनकर, मोहन काला,  रितेश छेत्री, संग्राम सिंह पुंडीर, ओम प्रकाश सती, राजपाल खारोला, नजमा खान, चंद्रकला नेगी, सीपी सिंह, दर्शन लाल, रितेश जोशी व विपुल जैन आदि उपस्थित थे।

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