- शिक्षकों को वर्ष 2016 से नियमित वेतन न दिए जाने का मामला
- 11 अगस्त तक जवाब पेश करने को कहा
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में प्राइमरी मदरसों में वर्ष 2006 से 2008 के बीच स्पेशल स्कीम के तहत नियुक्त किए शिक्षकों को वर्ष 2016 से नियमित वेतन न दिए जाने और पूर्व में दिए गए कोर्ट के आदेशों का पालन न करने को लेकर दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई हुई।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने सचिव अल्पसंख्यक कल्याण को फिर से अवमानना का नोटिस जारी किया, उनसे 11 अगस्त तक जवाब पेश करने को कहा गया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 अगस्त की तिथि नियत की है।
याचिकाकर्ताओ की तरफ से कहा गया कि अभी तक कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं हुआ है। न ही कमेटी गठित हुई है। इसी से जुड़े मामले में अन्य की तरफ से दायर अवमानना याचिकाओं पर भी सचिव को नोटिस जारी हुआ था, लेकिन अभी तक उसपर भी कार्रवाई नहीं हुई।
मामले के अनुसार हरिद्वार निवासी संजय और अन्य ने उच्च न्यायालय में कोर्ट के पूर्व के आदेशों का अनुपालन न करने को लेकर अवमानना याचिका दायर की। उन्होंने याचिका में कहा है कि वर्ष 2023 में कोर्ट ने अल्पसंख्यक सचिव को 3 सदस्यीय कमेटी गठित कर 4 माह में याचिकाकर्ताओं के प्रपत्रों की जांच कर शिक्षकों के देयकों का भुगतान करने के आदेश जारी किए थे, बावजूद इसके उन्हें आज तक देयकों का भुगतान नहीं किया गया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2006 से 2008 के बीच उन्हें स्पेशल स्कीम के तहत मदरसों में नियुक्ति दी गई। वर्ष 2016 के बाद न तो उन्हें नियमित रूप से वेतन दिया गया और न ही उन्हें अन्य देयकों का भुगतान किया गया, इससे उन्हें जीवन यापन करने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।










































