विद्यार्थी को धार्मिक शिक्षा के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा : डॉ. गांधी

student shall not be compelled to receive religious instruction

देहरादून। अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की ओर से शनिवार को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सभागार में जैन, बौद्ध, क्रिश्चियन, पारसी, मुस्लिम और सिख समुदाय के उन शिक्षण संस्थानों के प्राचार्य व प्रबंधकों के साथ बैठक की गई, जो वर्तमान में शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त संस्थानों का संचालन कर रहे हैं।

प्राधिकरण के निदेशक गिरधारी सिंह रावत ने कहा कि सरकार की और से निर्धारित नियमों और मानकों को पूरा करने वाले सभी शिक्षण संस्थान प्राधिकरण से संबद्धता प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट लॉन्च की जाएगी। तब तक संस्थानों से आवश्यक दस्तावेज और आवेदन संबंधी प्रपत्र तैयार रखने को कहा गया है।

प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए दूरदर्शी पहल की है। उन्होंने बताया कि विभिन्न धर्मों से संबंधित धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में एकरूपता लाई जाएगी। साथ ही प्राधिकरण की ओर से धार्मिक शिक्षा से जुड़ी परीक्षाएं आयोजित कर प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी विद्यार्थी को धार्मिक शिक्षा ग्रहण करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण की और से निर्धारित पाठ्यक्रम को 1 जुलाई 2026 से लागू किया जाएगा। बैठक में उप-पंजीयक राम सिंह, खुर्शीद अहमद, विजय कुमार, रमीज रजा व फरहा अजीम समेत प्रदेश के 63 शिक्षण संस्थानों के प्राचार्य, प्रबंधक और अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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