राम माधव बने उत्तराखण्ड भाजपा के नए प्रदेश प्रभारी

राम माधव बने उत्तराखण्ड भाजपा के नए प्रदेश प्रभारी

देहरादून। विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले उत्तराखण्ड भाजपा में बड़ा बदलाव हो गया है। भाजपा आलाकमा  ने उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम को हटा दिया है। उनके स्थान पर अब राम माधव को उत्तराखंड का प्रदेश प्रभारी बनाया है। इसके अलावा सह प्रभारी को भी बदला गया है। भाजपा ने बांसुरी स्वराज और अरविंद मेनन को उत्तराखंड प्रदेश का सह प्रभारी बनाया है।

बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कई राज्यों के प्रदेश प्रभारियों और सह प्रभारियों की नियुक्तियां की है। जिसमें उत्तराखंड का नाम भी शामिल है। जहां राम माधव को उत्तराखंड बीजेपी प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले दुष्यंत गौतम बीजेपी प्रदेश प्रभारी का जिम्मा संभाल रहे थे। उन्हें अब प्रदेश प्रभारी पद से हटा दिया गया है।राम माधव के पास उत्तराखंड के अलावा तमिलनाडु बीजेपी प्रभारी की जिम्मेदारी भी रहेगी।

वहीं, बांसुरी स्वराज को उत्तराखंड बीजेपी की सह प्रभारी बनाया गया है। इससे पहले रेखा वर्मा सह प्रभारी थीं. जबकि, दुष्यंत गौतम को कोई पद नहीं दिया गया है। गौर हो कि दुष्यंत गौतम को लेकर उत्तराखंड में कई नाराजगी की स्थिति थी। उनका नाम कथित पर अंकिता भंडारी केस में लिया जा रहा था। भाजपा  ने बांसुरी स्वराज और अरविंद मेनन को उत्तराखंड प्रदेश का सह प्रभारी बनाया है।

बांसुरी स्वराज और अरविंद मेनन से पहले रेखा वर्मा उत्तराखंड की सह प्रभारी थी। रेखा वर्मा को एमपी का सहप्रभारी बनाया गया है। रेखा वर्मा लंबे समय से उत्तराखंड संगठन में काम कर रही थी। अब संगठन ने उन्हें एमपी भेजा है। रेखा वर्मा की जगह बांसुरी स्वराज को उत्तराखंड भेजा गया है। बांसुरी स्वराज बीजेपी की फायर ब्रांड नेता रही सुषमा स्वराज की बेटी हैं।

बांसुरी स्वराज दिल्ली से सांसद है। बांसुरी स्वराज की गिनती तेज तर्रार नेताओं में होती है। बांसुरी स्वराज पेशे से वकील हैं। उन्होंने इंग्लैंड के प्रतिष्ठित वारविक विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में बीए ऑनर्स और इंग्लैंड के ही प्रतिष्ठित बीपीपी लॉ स्कूल से कानून की पढ़ाई की है।

बांसुरी ने इंग्लैंड के ही ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के कैथरीन कॉलेज से मास्टर ऑफ स्टडीज की भी पढ़ाई की है। 2007 में लंदन से बैरिस्टर के रूप में भी योग्यता प्राप्त की है। 2007 में ही बार काउंसिल ऑफ दिल्ली में अपना पंजीकरण कराया। इसके बाद से ही वह दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रही हैं।

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