- कहा, पहाड़ के मरीजों को डंडी-कंडी से कब मुक्ति मिलेगी?
- राहुल गांधी पर सवाल उठाने पर बिफरी कांग्रेस
देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल की और से राहुल गांधी पर लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि राहुल गांधी देश के नेता प्रतिपक्ष हैं और देश के युवाओं, छात्रों और लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल उठाना उनका संवैधानिक और राजनीतिक दायित्व है। इसलिए सुबोध उनियाल को राहुल गांधी की चिंता करने के बजाय अपने विभाग और अपने राज्य की चिंता करनी चाहिए।
गरिमा ने पूछा कि मंत्री जी बताए स्वास्थ्य व्यवस्था कब सुधरेगी? पहाड़ की महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचने के लिए डंडी-कंडी से कब मुक्ति मिलेगी? अस्पतालों में सुरक्षा और सम्मानजनक इलाज कब मिलेगा? और करोड़ों की लागत से बने पुल 16 दिन में क्यों धंस रहे हैं? उन्होने कहा कि झारखंड के छात्र आंदोलन पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाने से पहले सुबोध उनियाल को तथ्य देख लेने चाहिए।
झारखंड सरकार ने छात्रों से कई दौर की बातचीत की है और उनकी अनेक मांगों पर कार्रवाई की है। तीन जेपीएससी परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति बनी है, जेपीएससी के शीर्ष स्तर पर इस्तीफे हुए हैं, कथित अनियमितताओं की जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ी है तथा भर्ती व्यवस्था में सुधार और फास्ट-ट्रैक न्यायिक प्रक्रिया जैसे कदमों की बात सरकार ने स्वीकार की है। इसके बावजूद छात्रों पर 10 अगस्त को पुलिस बल प्रयोग की घटना हुई, जिस पर राहुल गांधी ने भी सवाल उठाए हैं।
कहा कि अपने स्वास्थ्य विभाग की हालत पर भी नजर डालें। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में आज भी कई दुर्गम क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं और मरीजों को सड़क तक पहुंचाने के लिए डंडी-कंडी और स्ट्रेचर का सहारा लेना पड़ता है। रोज अस्पतालों में मरीजों और चिकित्सकों के बीच विवाद, चिकित्सा व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें, पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और बुनियादी सुविधाओं का अभाव, इन सवालों का जवाब स्वास्थ्य मंत्री को देना चाहिए।
राहुल गांधी ने झारखंड में छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग की आलोचना की है, झारखंड के छात्रों के सवालों को राजनीतिक रंग नहीं दिया। शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बल प्रयोग गलत है, यह बात लोकतंत्र में सत्ता पक्ष को भी स्वीकार करनी चाहिए।










































