उत्तराखण्ड में सियासी चर्चा तेज

Political buzz intensifies in Uttarakhand

देहरादून। राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि नेताओं की मुलाकातें सिर्फ मुलाकातें नहीं होतीं, उनके अपने राजनीतिक संदेश और मायने भी होते हैं। उत्तराखंड की राजनीति में गुरुवार को कुछ ऐसा ही देखने को मिला। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से एक ही दिन में भाजपा के तीन लोकसभा सांसद, दो राज्यसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों की तस्वीरें और जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से सार्वजनिक किए जाने के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

आधिकारिक तौर पर इन बैठकों को क्षेत्रीय विकास, संगठनात्मक विषयों और राज्यहित के मुद्दों पर चर्चा बताया गया है। मुख्यमंत्री ने नैनीताल-ऊधम सिंहनगर से सांसद अजय भट्ट, टिहरी सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, राज्यसभा सांसद डॉ. कल्पना सैनी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट तथा पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक से अलग-अलग मुलाकात की।

हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जब इतने वरिष्ठ नेताओं से एक ही दिन में अलग-अलग बैठकें हों और उनकी तस्वीरें स्वयं मुख्यमंत्री कार्यालय जारी करे, तो राजनीतिक हलकों में सवाल उठना स्वाभाविक है। चर्चा इस बात की भी है कि क्या यह केवल नियमित संवाद था या फिर आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए संगठन और सरकार के बीच किसी बड़ी रणनीति पर मंथन हुआ।

भाजपा के भीतर इन दिनों चुनावी तैयारियों को लेकर गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे समय में सांसदों और वरिष्ठ नेताओं के साथ मुख्यमंत्री की लगातार बैठकों को कई राजनीतिक पर्यवेक्षक संगठनात्मक समन्वय मजबूत करने की कवायद मान रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि सरकार के कामकाज, क्षेत्रीय समीकरण और चुनावी रणनीति को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ हो सकता है।

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक की मुलाकात ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है। लंबे समय से सक्रिय राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका निभा रहे निशंक की मुख्यमंत्री से भेंट को भी कई तरह के राजनीतिक संकेतों के नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि, आधिकारिक जानकारी में इसे भी क्षेत्रीय विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा ही बताया गया है।

भाजपा की ओर से इन मुलाकातों को लेकर किसी विशेष राजनीतिक उद्देश्य की पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन सियासी गलियारों में सवाल यही है कि यदि ये सामान्य शिष्टाचार मुलाकातें थीं, तो फिर एक ही दिन में इतने बड़े नेताओं से अलग-अलग बैठकों को सार्वजनिक करने के पीछे क्या संदेश था?

फिलहाल इन सवालों का कोई आधिकारिक जवाब नहीं है। लेकिन इतना तय है कि उत्तराखंड की राजनीति में इन मुलाकातों ने चर्चाओं का नया दौर शुरू कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में भाजपा के संगठन और सरकार के स्तर पर क्या नई राजनीतिक हलचल देखने को मिलती है।

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