शीतकालीन यात्रा से सालभर रोजगार के अवसर सृजित होंगेः महाराज

Winter travel will create employment opportunities

देहरादून। उत्तराखण्ड के पर्यटन, धर्मस्व, संस्कृति, पंचायतीराज, लोक निर्माण, सिंचाई, ग्रामीण निर्माण एवं जलागम मंत्री सतपाल महाराज ने बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ग्रीष्मकालीन चारधाम यात्रा के निर्विघन रूप से संपन्न होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व की भांति इस बार भी चारधाम यात्रा पर रिकॉर्ड श्रद्धालु पहुंचे हैं।

उन्होंने यात्रा व्यवस्था में लगे सभी विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों, तीर्थ-पुरोहितों, होटल व्यवसायियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने वाले ट्रांसपोर्टरों सहित यात्रा में आने वाले सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया है। महाराज ने कहा कि है कि इस बार चारधामों में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 51 लाख तक पहुंच गया जो स्वयं में रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि अब सरकार का पूरा ध्यान शीतकालीन यात्रा और उसकी व्यवस्थाओं पर है। अब चारधामों की पूजा अर्चना शीतकालीन प्रवास स्थलों पर होगी जहां पर श्रद्धालु शीतकालीन यात्रा में पूजा पाठ कर दर्शनों का लाभ उठा सकते हैं।

महाराज ने कहा कि उत्तराखंड की शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने के लिए 6 मार्च 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माँ गँगा के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखवा से देश विदेश के श्रद्धालुओं को शीतकालीन यात्रा पर उत्तराखंड आने के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने कहा कि 24 अक्टूबर 2025 से शीतकालीन चारधाम यात्रा का श्री गणेश हो चुका है। यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पूर्व में ही सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।  

महाराज ने कहा कि मंगलवार का दिन हमारे लिए दो शुभ अवसर का साक्षी बनने का अवसर रहा है। एक ओर चारधाम यात्रा का संपन्न होना और दूसरी ओर अयोध्या में बने भव्य श्री राम मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज स्थापना का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अवसर राम मंदिर निर्माण की पूर्णता का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि धर्म ध्वजा का आरोहण मंदिर निर्माण की पूर्णता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है।

भगवा ध्वज का रंग सूर्यवंश का निशान है, जो भगवान राम के तेज और शौर्य का प्रतीक है। भगवा ध्वज सत्य की विजय का प्रतीक है, जो भगवान राम के आदर्शों और मूल्यों को दर्शाता है। यह ध्वज सनातन धर्म और संस्कृति की पुनर्स्थापना को दर्शाता है।

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