गुलदार व भालू के आतंक से पहाड़ वासियों का जीवन हुआ कठिन

Terror of leopards and bears

रुद्रप्रयाग। जनपद में भालुओं के साथ ही गुलदार का भी लगातार आतंक बढ़ रहा है। आये दिन भालु व गुलदार पालतू मवेशियों को निवाला बना रहे हैं। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति इतनी भयावह है कि सायं होते ही लोग घरों में दुबह रहे हैं। सुबह के समय परिजन बच्चों को स्वयं स्कूल छोड़ने जा रहे हैं। एक सप्ताह के भीतर जनपद में भालु व गुलदार लगभग एक दर्जन मवेशियों को निवाला बनाने के साथ ही घायल कर चुके हैं।

जनपद के अलग-अलग हिस्सों में इन दिनों भालु व गुलदार का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। विकासखण्ड अगस्त्यमुनि के अंतर्गत दशज्यूला काण्डई के जरम्वाड़ ढुंग के साथ ही थपलगांव में गुलदार का आतंक बना हुआ है। एक सप्ताह के भीतर गुलदार ने ढुंग व थपलगांव के दयूका तोक से तीन पालूत मवेशियों को निवाला बना दिया है।

गांवों में आये दिन गुलदार की धमक है और ग्रामीण भय के साये में जीवन यापन कर रहे हैं। क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य जयवर्धन काण्डपाल ने कहा कि क्षेत्र के अनेक गांवों में गुलदार का आतंक बना हुआ है। गुलदार आये दिन गांवों में पहुंचकर पालतू मवेशियों का शिकार कर रहा है। ग्रामीण महिलाओं का जंगलों में जाना भी दुभर हो रखा है।

उन्होंने वन विभाग से क्षेत्र में पिजंरा लगाकर गुलदार को पकड़ने की मांग की है। दूसरी ओर भालु के आतंक से भी ग्रामीण भयभीत हैं। जनपद की बांगर, बच्छणस्यूं, रानीगढ़ व धनपुर पटटी में भालु कई मवेशियों को निवाला बना हुआ है। केदारघाटी के अनेक गांवों में भी भालु की धमक लगातार बढ़ती जा रही है। भालु के आतंक से प्रभावित गांवों में स्कूली नौनिहालों को परिजन विद्यालय तक पहुंचा रहे हैं।

पूर्व जिला पंचायत सदस्य नरेन्द्र सिंह बिष्ट ने कहा कि भालु, गुलदार, सुअर व बंदर पहाड़ों के लिये अभिशाप बन चुके हैं। जंगली जानवरों के भय से लोग खेती नहीं कर पा रहे हैं। खेतों की फसलों को सुअर व बंदर नुकसान पहुंचा रहे हैं और खेतों में कार्य करने वाले लोगों को भालु व गुलदार से खतरा बना हुआ है। आये दिन जनपद के किसी न किसी क्षेत्र में गुलदार व भालु के हमले में लोग घायल हो रहे हैं या फिर बेजुबान जानवर अपनी जान गंवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग को इन जंगली जानवरों से ग्रामीणों को निजात दिलानी चाहिये।

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