देहरादून। डिजिटल धोखाधड़ी के लिए शीर्ष अदालत ने बैंकों को भी बहुत अधिक हद तक जिम्मेदार ठहराया है और कहा है कि वह अपनी जिम्मेदारियां भूल रहे हैं और ऐसे मामलों में ग्राहकों को ठगी से बचाने के लिए एक चेतावनी तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए हैं। अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करके बैंक इस प्रकार के होने वाले आर्थिक अपराधों से कई प्रभावशाली कदम उठा सकते हैं।
धोखाधड़ी के बहुत ही कम मामलों में ग्राहकों के डूबे पैसों को रिकवर किया जा सका है। कई बार बैंकों द्वारा अलर्ट देने के बावजूद बैंक उपभोक्ता अपना पैसा लालच एवं डर के कारण खो बैठते हैं और पता चलने तक बहुत देर हो चुकी होती है।
अब भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ठगी रोकने के लिए एक एसओपी तैयार करी है जिसमें साइबर धोखाधड़ी के शक होने पर डेबिट कार्ड को भी ब्लॉक किया जा सकता है और अदालत ने इसे देश भर में लागू करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में विज्ञापनों के द्वारा एवं अन्य माध्यमों से सतर्कता बरतने के लिए के लिए सुझाव दिए गए हैं जो आशा है भविष्य में प्रभावशाली सिद्ध होंगे।
जितेंद्र कुमार डंडोना
पूर्व निवेश सलाहकार भारतीय स्टेट बैंक








































