राज्य कर्मचारियों ने राज्य सरकार के खिलाफ भरी हुंकार

State employees raised their voice against state government

देहरादून। राज्य कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ हुंकार भर दी है। राज्य निगम कर्मचारी अधिकारी महासंघ ने शासन और सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। अब महासंघ की दस सूत्रीय मांगों को नहीं माना गया तो महासंघ आर पार की लड़ाई लड़ने के लिये सड़कों पर उतरेगा।

गुरुवार को महासंघ के प्रदेश महासचिव एसएस नेगी व अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि उत्तराखंड राज्य में करीब 40,000 कर्मचारी हैं। जिनकी मांगे मानने के लिए सरकार और शासन तैयार नजर नहीं आ रहा है। यही कारण है कि महासंघ काफी अधिक आक्रोशित है। शासन-सरकार से आर पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। इसके तहत 23 अप्रैल को हल्द्वानी बस अड्डे पर धरना प्रदर्शन कार्यक्रम किया जाएगा।

इसी के साथ 30 अप्रैल को गढ़वाल मंडल विकास निगम कार्यालय हरिद्वार में धरना प्रदर्शन करेंगे। इसी कड़ी में 12 मई से देहरादून के एकता विहार में क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा। सरकार से आर पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कार्य बहिष्कार करने से भी अब महासंघ पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने कहा मांगों को लेकर एक बार मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक भी हो चुकी है। इसके बावजूद आज भी उनकी मांगे लंबित हैं।

महासंघ प्रदेश महासचिव एसएस नेगी ने कहा उनकी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर एक बार फिर मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजा जा रहा है। उनकी इन मांगों में मुख्य रूप से सार्वजनिक निगमों में जॉब वर्क के नाम पर जो ठेका प्रथा चली आ रही है उसे समाप्त किया जाना चाहिए।

इसी के साथ सार्वजनिक निगम, निकाय, संस्थाओं, उपक्रमों में संरचनात्मक ढांचों का पुनर्गठन करते हुए रिक्त पदों को जल्द भरा जाए। उनकी मांगों में मुख्य रूप से एमएसीपी में रुपए 1900 ग्रेड पे को समाप्त कर 2000 किए जाने तथा सार्वजनिक निकायों निगम संस्थानों में वर्ष 2014 के पश्चात कार्यरत सभी कार्मिकों को पेंशन लागू किया जाना शामिल है।

सार्वजनिक निगम, निकाय, संस्थान, उपक्रमों में कार्यरत संविदा, उपनल, आउटसोर्स विशेष श्रेणी, दैनिक वेतन, पीटीसी कार्मिकों को जल्द नियमित किया जाये। सभी को सामाजिक सुरक्षा भी प्रदान करने की जाये। उनकी ये ही मांगे हैं।

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